35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi

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35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi

35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi

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35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi-AMANAT

हर जनम में….

हर जनम में उसी की चाहत थे;

हम किसी और की अमानत थे;

उसकी आँखों में झिलमिलाती हुई;

हम ग़ज़ल की कोई अलामत थे;

तेरी चादर में तन समेट लिया;

हम कहाँ के दराज़क़ामत थे;

जैसे जंगल में आग लग जाये;

हम कभी इतने ख़ूबसूरत थे;

पास रहकर भी दूर-दूर रहे;

हम नये दौर की मोहब्बत थे;

इस ख़ुशी में मुझे ख़याल आया;

ग़म के दिन कितने ख़ूबसूरत थे

दिन में इन जुगनुओं से क्या लेना;

ये दिये रात की ज़रूरत थे।

कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे; Best Ghazal Shayari

कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे;

ऐ अँधेरी बस्तियो! तुमको खुदा रौशन करे;

नन्हें होंठों पर खिलें मासूम लफ़्ज़ों के गुलाब;

और माथे पर कोई हर्फ़-ए-दुआ रौशन करे;

ज़र्द चेहरों पर भी चमके सुर्ख जज़्बों की धनक;

साँवले हाथों को भी रंग-ए-हिना रौशन करे;

एक लड़का शहर की रौनक़ में सब कुछ भूल जाए;

एक बुढ़िया रोज़ चौखट पर दिया रौशन करे;

ख़ैर अगर तुम से न जल पाएँ वफाओं के चिराग;

तुम बुझाना मत जो कोई दूसरा रौशन करे।

Tera Chehara Ghazal And Shayari

तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है;

सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है;

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है;

तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है;

रात हमारे साथ तू जागा करता है;

चाँद बता तू कौन हमारा लगता है;

किस को खबर ये कितनी कयामत ढाता है;

ये लड़का जो इतना बेचारा लगता है;

तितली चमन में फूल से लिपटी रहती है;

फिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है;

‘कैफ’ वो कल का ‘कैफ’ कहाँ है आज मियाँ;

ये तो कोई वक्त का मारा लगता है।

Fareb nazar Bewafai – Ghazal – Shayari 

Bewafa Shayari And Ghazal

नज़र फ़रेब-ए-कज़ा खा गई तो क्या होगा;

हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा;

नई सहर के बहुत लोग मुंतज़िर हैं मगर;

नई सहर भी कजला गई तो क्या होगा;

न रहनुमाओं की मजलिस में ले चलो मुझको;

मैं बे-अदब हूँ हँसी आ गई तो क्या होगा;

ग़म-ए-हयात से बेशक़ है ख़ुदकुशी आसाँ;

मगर जो मौत भी शर्मा गई तो क्या होगा;

शबाब-ए-लाला-ओ-गुल को पुकारनेवालों;

ख़िज़ाँ-सिरिश्त बहार आ गई तो क्या होगा;

ख़ुशी छीनी है तो ग़म का भी ऐतमाद न कर;

जो रूह ग़म से भी उकता गई तो क्या होगा।

Pyar ki Had Ghazal Bewafa Shayari Forever

tere pyar ki Had

तेरे कमाल की हद कब कोई बशर समझा;

उसी क़दर उसे हैरत है, जिस क़दर समझा;

कभी न बन्दे-क़बा खोल कर किया आराम;

ग़रीबख़ाने को तुमने न अपना घर समझा;

पयामे-वस्ल का मज़मूँ बहुत है पेचीदा;

कई तरह इसी मतलब को नामाबर समझा;

न खुल सका तेरी बातों का एक से मतलब;

मगर समझने को अपनी-सी हर बशर समझा। 

35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi – Dosti Aur Pyar

मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना;

तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना;

तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई;

तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना;

शिकस्ता के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लो;

अगर तुम जोड़ सको तो यह गुलदान ले जाना;

तुम्हें ऐसे तो खाली हाथ रुखसत कर नहीं सकते;

पुरानी दोस्ती है, की कुछ पहचान ले जाना;

 

इरादा कर लिया है तुमने गर सचमुच बिछड़ने का;

तो फिर अपने यह सारे वादा-ओ-पैमान ले जाना;

अगर थोड़ी बहुत है, शायरी से उनको दिलचस्पी;

तो उनके सामने मेरा यह दीवान ले जाना।

35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi  – Buri Nazar

बुझी नज़र तो करिश्मे भी रोज़ो शब के गये;

कि अब तलक नही पलटे हैं लोग कब के गये;

करेगा कौन तेरी बेवफ़ाइयों का गिला;

यही है रस्मे ज़माना तो हम भी अब के गये;

मगर किसी ने हमें हमसफ़र नही जाना;

ये और बात कि हम साथ साथ सब के गये;

अब आये हो तो यहाँ क्या है देखने के लिए;

ये शहर कब से है वीरां वो लोग कब के गये;

गिरफ़्ता दिल थे मगर हौसला नहीं हारा;

गिरफ़्ता दिल है मगर हौंसले भी अब के गये;

तुम अपनी शम्ऐ-तमन्ना को रो रहे हो ‘फ़राज़’;

इन आँधियों में तो प्यारे चिराग सब के गये।

 

भड़का रहे हैं आग…Shayari And Ghazal In Hindi 

 

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागार से हम;

ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम;

कुछ और बड़ गए अंधेरे तो क्या हुआ;

मायूस तो नहीं हैं तुलु-ए-सहर से हम;

ले दे के अपने पास फ़क़त एक नज़र तो है;

क्यों देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके;

कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम।

best urdu Ghazal And Shayari

Bewafa Shayari And Ghazal sad

फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया;

अच्छा भला इक शहर वीरान हो कर रह गया;

हर नक्श बतल हो गया अब के दयार-ए-हिज्र में;

इक ज़ख्म गुज़रे वक्त की पहचान हो कर रह गया;

रुत ने मेरे चारों तरफ खींचें हिसार-ए-बाम-ओ-दर;

यह शहर फिर मेरे लिए ज़ान्दान हो कर रह गया;

कुछ दिन मुझे आवाज़ दी लोगों ने उस के नाम से;

फिर शहर भर में वो मेरी पहचान हो कर रह गया;

इक ख्वाब हो कर रह गई गुलशन से अपनी निस्बतें;

दिल रेज़ा रेज़ा कांच का गुलदान हो कर रह गया;

ख्वाहिश तो थी “साजिद” मुझे तशीर-ए-मेहर-ओ-माह की;

लेकिन फ़क़त मैं साहिब-ए-दीवान हो कर रह गया।

 

ज़रा-सी देर में…Ghazal

 

ज़रा-सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा;

ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा;

न जाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं;

हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा;

सफ़ीना हो के हो पत्थर, हैं हम अंज़ाम से वाक़िफ़;

तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा;

समन्दर के सफर में किस्मतें पहलू बदलती हैं;

अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा;

मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको;

किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा।

 

सीने में जलन…Hindi Ghazal

 

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यों है;

इस शहर में हर शख़्स परेशान-सा क्यों है;

दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे;

पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान-सा क्यों है;

तन्हाई की ये कौन-सी मंज़िल है रफ़ीक़ो;

ता-हद्द-ए-नज़र एक बियाबान-सा क्यों है;

हमने तो कोई बात निकाली नहीं ग़म की;

वो ज़ूद-ए-पशेमान, परेशान-सा क्यों है;

क्या कोई नई बात नज़र आती है हममें;

आईना हमें देख के हैरान-सा क्यों है।

Meri Zindagi

कभी मुझ को साथ लेकर, कभी मेरे साथ चल के;

वो बदल गए अचानक, मेरी ज़िन्दगी बदल के;

हुए जिस पे मेहरबाँ, तुम कोई ख़ुशनसीब होगा;

मेरी हसरतें तो निकलीं, मेरे आँसूओं में ढल के;

तेरी ज़ुल्फ़-ओ-रुख़ के, क़ुर्बाँ दिल-ए-ज़ार ढूँढता है;

वही चम्पई उजाले, वही सुरमई धुंधल के;

कोई फूल बन गया है, कोई चाँद कोई तारा;

जो चिराग़ बुझ गए हैं, तेरी अंजुमन में जल के;

मेरे दोस्तो ख़ुदारा, मेरे साथ तुम भी ढूँढो;

वो यहीं कहीं छुपे हैं, मेरे ग़म का रुख़ बदल के;

तेरी बेझिझक हँसी से, न किसी का दिल हो मैला;

ये नगर है आईनों का, यहाँ साँस ले संभल के।

नींद की ओस से…Ghazal urdu

 

नींद की ओस से पलकों को भिगोये कैसे;

जागना जिसका मुकद्दर हो वो सोये कैसे;

रेत दामन में हो या दश्त में बस रेत ही है;

रेत में फस्ल-ए-तमन्ना कोई बोये कैसे;

ये तो अच्छा है कोई पूछने वाला न रहा;

कैसे कुछ लोग मिले थे हमें खोये कैसे;

रूह का बोझ तो उठता नहीं दीवाने से;

जिस्म का बोझ मगर देखिये ढोये कैसे;

वरना सैलाब बहा ले गया होगा सब कुछ;

आँख की ज़ब्त की ताकीद है रोये कैसे।

35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi – Yaad

Bewafa Shayari And Ghazal for love

कब याद मे तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं;

साद शुक्र की अपनी रातो में अब हिज्र की कोई रात नहीं;

मुश्किल है अगर हालत वह, दिल बेच आए, जा दे आए;

दिल वालो कूचा-ए-जाना में, क्या ऐसे भी हालात नहीं;

जिस धज से कोई मकतल में गया, वो शान सलामत रहती है;

ये जान तो आनी-जानी है, इस जान की तो कोई बात नहीं;

मैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं, या नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ;

आशिक तो किसी का नाम नहीं, कुछ इश्क किसी की जात नहीं;

गर बाज़ी इश्क की बाज़ी है, ओ चाहो लगा दो दर कैसा;

गर जीत गए तो क्या कहने, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं।

तेरी हर बात मोहब्बत में…

 

तेरी हर बात मोहब्बत में गंवारा करके;

दिल के बाज़ार में बैठे हैँ ख़सारा करके;

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे;

वो अलग हट गया आँधी को इशारा करके;

मुन्तज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे;

चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा करके;

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी;

तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

देखा तो था यूं ही…

 

देखा तो था यूं ही किसी ग़फ़लत-शिआर ने;

दीवाना कर दिया दिल-ए-बेइख़्तियार ने;

ऐ आरज़ू के धुंधले ख्वाबों जवाब दो;

फिर किसकी याद आई थी मुझको पुकारने;

तुमको ख़बर नहीं मगर इक सादालौह को;

बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने;

मैं और तुमसे तर्क-ए-मोहब्बत की आरज़ू;

दीवाना कर दिया है ग़म-ए-रोज़गार ने;

अब ऐ दिल-ए-तबाह तेरा क्या ख्याल है;

हम तो चले थे काकुल-ए-गेती सँवारने।

तुम न आये एक दिन…

तुम न आये एक दिन का वादा कर दो दिन तलक;

हम पड़े तड़पा किये दो-दो पहर दो दिन तलक;

दर्द-ए-दिल अपना सुनाता हूँ कभी जो एक दिन;

रहता है उस नाज़नीं को दर्द-ए-सर दो दिन तलक;

देखते हैं ख़्वाब में जिस दिन किस की चश्म-ए-मस्त;

रहते हैं हम दो जहाँ से बेख़बर दो दिन तलक;

गर यक़ीं हो ये हमें आयेगा तू दो दिन के बाद;

तो जियें हम और इस उम्मीद पर दो दिन तलक;

क्या सबब क्या वास्ता क्या काम था बतलाइये;

घर से जो निकले न अपने तुम “ज़फ़र” दो दिन तलक।

35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi – aankhon me
मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा;

लेकिन मेरी आँखों में तुझे डर न मिलेगा;

सर पर तो बिठाने को है तैयार जमाना;

लेकिन तेरे रहने को यहाँ घर न मिलेगा;

जाती है, चली जाये, ये मैखाने कि रौनक;

कमज़र्फो के हाथो में तो सागर न मिलेगा;

दुनिया की तलब है, कनाअत ही न करना

कतरे ही से खुश हो, तो समन्दर न मिलेगा।

ek Katra – Ghazal Shayari

एक क़तरा मलाल भी बोया नहीं गया;

वो खौफ था के लोगों से रोया नहीं गया;

यह सच है के तेरी भी नींदें उजड़ गयीं;

तुझ से बिछड़ के हम से भी सोया नहीं गया;

उस रात तू भी पहले सा अपना नहीं लगा;

उस रात खुल के मुझसे भी रोया नहीं गया;

दामन है ख़ुश्क आँख भी चुप चाप है बहुत;

लड़ियों में आंसुओं को पिरोया नहीं गया;

अलफ़ाज़ तल्ख़ बात का अंदाज़ सर्द है;

पिछला मलाल आज भी गोया नहीं गया;

अब भी कहीं कहीं पे है कालख लगी हुई;

रंजिश का दाग़ ठीक से धोया नहीं गया।

मैं खुद भी सोचता हूँ…

 

मैं खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है;

जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है;

घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था;

क्या मुझसे खो गया है, मुझे क्या मलाल है;

आसूदगी से दिल के सभी दाग धुल गए;

लेकिन वो कैसे जाए, जो शीशे में बल है;

बे-दस्तो-पा हू आज तो इल्जाम किसको दूँ;

कल मैंने ही बुना था, ये मेरा ही जाल है;

फिर कोई ख्वाब देखूं, कोई आरजू करूँ;

अब ऐ दिल-ए-तबाह, तेरा क्या ख्याल है।

Dekha Hai Gaur Se

वो जो वह एक अक्स है सहमा हुआ डरा हुआ;

देखा है उसने गौर से सूरज को डूबता हुआ;

तकता हु कितनी देर से दरिया को मैं करीब से;

रिश्ता हरेक ख़त्म क्या पानी से प्यास का हुआ;

होठो से आगे का सफर बेहतर है मुल्तवी करे;

वो भी है कुछ निढाल सा मैं भी हु कुछ थका हुआ;

कल एक बरहना शाख से पागल हवा लिपट गयी;

देखा था खुद ये सानिहा, लगता है जो सुना हुआ;

पैरो के निचे से मेरे कब की जमीं निकल गयी;

जीना है और या नहीं अब तक न फैसला हुआ। 

Jhutha Nikla pyar tera

झूठा निकला क़रार तेरा;

अब किसको है ऐतबार तेरा;

दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;

देखा बस हम ने प्यार तेरा;

दम नाक में आ रहा था अपने;

था रात ये इंतिज़ार तेरा;

कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;

मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;

समझूँ कि है किनार तेरा;

‘akela’ से मत रूठ, खफा हो;

है बंदा जानिसार तेरा।

e zindagi-35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi 
हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे हैं मुझे;

ये ज़िन्दगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे;

जो आँसू में कभी रात भीग जाती है;

बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे;

मैं सो भी जाऊँ तो मेरी बंद आँखों में;

तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे;

मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ;

वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे;

मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह;

ये मेरा गाँव तो पहचाना सा लगे है मुझे;

बिखर गया है कुछ इस तरह आदमी का वजूद;

हर एक फ़र्द कोई सानेहा लगे है मुझे।

भड़का रहे हैं आग…

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागार से हम;

ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम;

कुछ और बड़ गए अंधेरे तो क्या हुआ;

मायूस तो नहीं हैं तुलु-ए-सहर से हम;

ले दे के अपने पास फ़क़त एक नज़र तो है;

क्यों देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके;

कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम।

इस अहद में इलाही…

इस अहद में इलाही मोहब्बत को क्या हुआ;

छोड़ा वफ़ा को उन्ने मुरव्वत को क्या हुआ;

उम्मीदवार वादा-ए-दीदार मर चले;

आते ही आते यारों क़यामत को क्या हुआ;

बख्शिश ने मुझ को अब्र-ए-करम की किया ख़िजल;

ए चश्म-ए-जोश अश्क-ए-नदामत को क्या हुआ;

जाता है यार तेग़ बकफ़ ग़ैर की तरफ़;

ए कुश्ता-ए-सितम तेरी ग़ैरत को क्या हुआ।

कोई चारा नहीं-35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi 

कोई चारा नहीं दुआ के सिवा;

कोई सुनता नहीं खुदा के सिवा;

मुझसे क्या हो सका वफ़ा के सिवा;

मुझको मिलता भी क्या सज़ा के सिवा;

कोई…

बरसरे-साहिले मुकाम यहां;

कौन उभरा है नाखुदा के सिवा;

कोई…

दिल सभी कुछ ज़ुबान पर लाया;

इक फ़क़त अर्ज़े-मुद्दा के सिवा;

कोई… 

 

तोड़ना टूटे हुए दिल का-top Ghazal Hindi

तोड़ना टूटे हुए दिल का बुरा होता है;

जिसका कोई नहीं उसका तो खुद होता है;

तोड़ना…

मांग कर तुमसे खुशी लूं मुझे मंज़ूर नहीं;

किसका मांगी हुई दौलत से भला होता है;

तोडना…

लोग नाहक किसी मजबूर को कहते हैं बुरा;

आदमी अच्छे हैं पर वक़्त बुरा होता है;

तोड़ना…

क्यों मुनीर अपनी तबाही का ये कैसा शिकवा;

जितना तक़दीर में लिखा है अदा होता है;

तोड़ना… 

चैन मिल जाए…..

कम नहीं मेरी ज़िन्दगी के लिए;

चैन मिल जाए दो घडी के लिए;

दिले-ज़ार कौन है तेरा;

क्यों तड़पता है यूं किसी के लिए;

चैन मिल जाए…

कितने सामान कर लिए पैदा;

इतनी छोटी सी ज़िन्दगी के लिए;

चैन मिल जाए….

ऐसा फ़ैयाज़ ग़म ने घेरा है;

लब तरस ही गए हंसी के लिए;

चैन मिल जाए….

निकले हम कहाँ से

निकले हम कहाँ से और किधर निकले;

हर मोड़ पे चौंकाए ऐसा अपना सफ़र निकले;

तु समझाया किया रो-रो के अपनी बात;

तेरे हमदर्द भी लेकिन बड़े बे-असर निकले;

बरसों करते रहे उनके पैगाम का इंतजार;

जब आया वो तो उनके बेवफा होने की खबर निकले;

अब संभले के चले ‘ज़हर’ और सफ़र की सोच;

ऐसा ना हो कि फिर से ये जगह उसी का शहर निकले;

तु भी रखता इरादे ऊँचे तेरा भी कोई मक़ाम होता;

पर तेरी किस्मत की हमेशा हर बात पे मगर निकले। 

तेरे ही क़दमों में

तेरे ही क़दमों में मरना भी अपना जीना भी;

कि तेरा प्यार है दरिया भी और सफ़ीना भी;

मेरी नज़र में सभी आदमी बराबर हैं;

मेरे लिए जो है काशी वही मदीना भी;

तेरी निगाह को इसकी ख़बर नहीं शायद;

कि टूट जाता है दिल-सा कोई नगीना भी;

बस एक दर्द की मंज़िल है और एक मैं हूँ;

कहूँ कि ‘तूर’! भला क्या है मेरा जीना भी। 

तप कर गमों की आग में

तप कर गमों की आग में कुंदन बने हैं हम;

खुशबू उड़ा रहा दिल चंदन से सने हैं हम;

रब का पयाम ले कर अंबर पे छा गए;

बिखरा रहे खुशी जग बादल घने हैं हम;

सच की पकड़ के बाँह ही चलते रहे सदा;

कितने बने रकीब हैं फ़िर भी तने हैं हम;

छुप कर करो न घात रे बाली नहीं हूँ मैं;

हमला करो कि अस्त्र बिना सामने हैं हम;

खोये किसी की याद में मदहोश है किया;

छेड़ो न साज़ दिल के हुए अनमने हैं हम।

बेनाम सा यह दर्द

बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता;

जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता;

सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें;

क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यूं नही जाता;

वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ मैं;

जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता;

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा;

जाते है जिधर सब मैं उधर क्यूं नही जाता;

वो नाम जो बरसों से न चेहरा है न बदन है;

वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूं नही जाता;

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूं नही जाता;

बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता।

तस्वीर का रुख

तस्वीर का रुख एक नहीं दूसरा भी है;

खैरात जो देता है वही लूटता भी है;

ईमान को अब लेके किधर जाइयेगा आप;

बेकार है ये चीज कोई पूछता भी है;

बाज़ार चले आये वफ़ा भी, ख़ुलूस भी;

अब घर में बचा क्या है कोई सोचता भी है;

वैसे तो ज़माने के बहुत तीर खाये हैं;

पर इनमें कोई तीर है जो फूल सा भी है;

इस दिल ने भी फ़ितरत किसी बच्चे सी पाई है;

पहले जिसे खो दे उसे फिर ढूँढता भी है।

यूँ तो यारो

यूँ तो यारो थकान भारी है;

फिर भी ख़ुद की तलाश जारी है;

हम में हर इक में इक परिन्दा है;

और हर इक में इक शिकारी है;

लोग दुनिया में दुख से मरते हैं;

और दुख से हमारी यारी है;

कितने ख़ुश हैं, उन्हें कहाँ मालूम;

हमने क़स्दन ये बाज़ी हारी है;

दिल को बेमोल बेच आए हम;

अपनी-अपनी दुकानदारी है। 

पत्नी बोली…Funny Shayari 

क्यों जी, दीपावली का सारा सामान आप लाये;

पर पटाखा एक भी न लाये;

मैंने कहा, तुम किस पटाखे से कम हो;

सच कहूँ तो समूचा डायनामाइट बम हो;

अपनी गलती हमेशा मुझ पर जड़ती हो;

सफाई में जब भी मैं कुछ कहूँ मुझ पर फट पड़ती हो।

मंजिल …35 Best Bewafa Shayari And Ghazal In Hindi 

पहर दिन सप्ताह महीने साल;

मत देखों मंजिल की चाह में;

ये देखों कि कितना चले हो;

और उसमें भी कितना भटके हो राह में;

यदि यह भटकाव कुछ कम हो जाए;

और तेजी ला दो चाल में;

तो बहुत मुमकिन है कि कामयाबी;

हांसिल हो जाए नए साल में। 

एक अजीब सी हालत है…

एक अजीब सी हालत हैं तेरे जाने के बाद;

भूख ही नहीं लगती खाना खाने के बाद;

मेरे पास 8 समोसे थे जो मैंने खा लिए;

1 तेरे आने से पहले 7 तेरे जाने के बाद;

नींद ही नहीं आती मुझे सोने के बाद;

नज़र कुछ नहीं आता आँखे बंद होने के बाद;

डॉक्टर से पूछा इसका इलाज़ दी 4 टैबलेट;

बोला खा लेना 2 जागने से पहले 2 सोने के बाद। 

अपनी यादें…

अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;

जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;

मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;

जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;

वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;

उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये।

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