मेरी रातों की राहत – Love Shayari

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मेरी रातों की राहत

मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना Romantic Shayari

मेरी रातों  की राहत

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मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना;
तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना;

तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई;
तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना;

शिकस्ता के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लो;
अगर तुम जोड़ सको तो यह गुलदान ले जाना;

तुम्हें ऐसे तो खाली हाथ रुखसत कर नहीं सकते;
पुरानी दोस्ती है, की कुछ पहचान ले जाना;

इरादा कर लिया है तुमने गर सचमुच बिछड़ने का;
तो फिर अपने यह सारे वादा-ओ-पैमान ले जाना;

अगर थोड़ी बहुत है, शायरी से उनको दिलचस्पी;
तो उनके सामने मेरा यह दीवान ले जाना।


कभी अहसास होता

मेरी रातों की राहत

कभी अहसास होता है मुकम्मल आदमी हूँ मैं
कभी लगता है जैसे आदमी की इक डमी हूँ मैं
कभी हूँ हर खुशी की राह में दीवार काँटों की
कभी हर दर्द के मारे की आँखों की नमी हूँ मैं
धधकता हूँ कभी ज्वालामुखी के गर्म लावे-सा
कभी पूनम की मादक चाँदनी-सा रेशमी हूँ मैं
कभी मेरे बिना सूना रहा, हर जश्न, हर महफिल
कभी त्यौहार पर भी एक सूरत मातमी हूँ मैं
कभी मौजूदगी मेरी चमन में फालतू लगती
कभी फूलों की मुस्कानों की खातिर लाजिमी हूँ मैं


मेरी रातों की राहत

खड़े है मुझको खरीदार देखने के लिए
मैं घर से निकला था बाज़ार देखने के लिए

हज़ार बार हज़ारों की सम्त देखते है
तरस गए तुझे इक बार देखने के लिए

क़तार में कई नाबीना लोग शामिल है
अमीरे-शहर का दरबार देखने के लिए

जगाए रखता हूँ सूरज को अपनी पलकों पर
जमीं को ख़्वाब से बे-दार देखने के लिए

अजीब शख़्श है लेता है जुगनुओं से ख़िराज
शबों को अपनी चमकदार देखने के लिए

हर-एक हर्फ़ से चिंगारियाँ निकलती है
कलेजा चाहिए अख़बार देखने के लिए